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भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी

भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में जया मैडम ने पढ़ाया- महिलाओं से अम्बेडकर के थे अवैध संबंध, बुद्ध थे अत्याचारी

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी की शिक्षिका जया श्रीवास्तव ने लेक्टर के दौरान क्लास में बेहद विवादित और गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की है। उन्होंने बाबा साहेब के बारे में जो कहा है उसको लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन से कार्रवाई की मांग पर छात्र अड़ गए हैं।

समाजशास्त्र विभाग की शिक्षिका जया श्रीवास्तव ने क्लास रूम में लेचर के दौरान पढ़ाया कि अम्बेडकर के अपनी पत्नी के अलावा अन्य महिलाओं के साथ अवैध संबंध थे। उनका अपनी पत्नी के साथ रिश्ता नहीं था। यह मनुवादी शिक्षिका यही नहीं रुकी। जया ने आगे कहा कि ज्ञान प्राप्ति की चाहत में बुद्ध ने अपनी पत्नी पर अत्याचार किये, उन्हें छोड़ दिया। ऐसे में उन्हें महिलाओ का हितैषी नहीं माना जा सकता। वह अत्याचारी थे।

बहुजन छात्रों ने जब इसको लिखित में देने के लिए कहा तो वह भड़क गईं। उन्होंने प्रोफेसर से बात करने की तमीज न होने का हवाला दिया। उन्होंने यहां तक कहा है कि तुम्हे मेरी कक्षा में आने की जरुरत नहीं है।

बहुजन छात्र शशिकांत भारती ने पूरे मुद्दे को लेकर एसटी/एससी सेल, कुलपति, समाजसास्त्र के विभागाध्यक्ष समेत की विभागों को पत्र लिखकर एफआईआर करवाने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि बहुजन छात्र-छात्राओं को अपमानित करने और उन्हें परेशान करने के लिए इस तरह की हरकत जया श्रीवास्तव करती रहती हैं।

यूनिवर्सिटी का माहौल खराब

बहुजन छात्र बताते हैं कि कभी अम्बेडकर का फोटो फड़वा दिया जाता है। कभी लेक्चर में बाबा साहेब को अपमानित करने वाली बात की जाती है। यह सबकुछ यहां का माहौल खराब करने के लिए साजिश के तहत मनुवादी व्यवस्था के लोग करवा रहे हैं। जया श्रीवास्तव खुद शिक्षिका हैं। वह महिलाओं को अम्बेडकर से अवैध संबंध बनाने वाली करार देकर सभी को अपमानित कर रही हैं। इसका कोई कहीं पर प्रमाण नहीं है। बुद्ध को भी उन्होंने जिस तरह से अत्याचारी कहा है, उससे तो साफ है कि यह सुनियोजित तरीके से बुद्धिज्म पर हमला हो रहा है।

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पीएम का छात्रों ने किया था विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बीबीएयू में आए थे, तो दो छात्रों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर वापस जाओ के नारे लगाए थे। छात्र इसी मनुवादी व्यवस्था से पीड़ित हैं। हर कोई उन्हें वोटबैंक का मोहरा बनाना चाहता है, लेकिन अम्बेडकर को कोई नहीं मानता।  

src: farkindia.org