Home / राज्य / गुजरात / बीजेपी के आतंक से डरी गोदी मीडिया, अमित शाह के खिलाफ सच छापने के बाद हटा दी खबर
बीजेपी के आतंक

बीजेपी के आतंक से डरी गोदी मीडिया, अमित शाह के खिलाफ सच छापने के बाद हटा दी खबर

क्या आप गोदी मीडिया और कॉर्पोरेट मीडिया में अंतर जानते हैं? गोदी मीडिया और कॉर्पोरेट मीडिया के अन्यत्र मिशनरी मीडिया का भी नाम आता है जो भारत में ना के बराबर पाया जाता है, इसके अतिरिक्त “हम तब तक इमानदार है जबतक हमे चोरी करने का मौका नहीं मिलता’ टाइप की मीडिया होती है उसका आप अपने हिसाब से नाम दे दीजियेगा या बोल सकते हैं मौकापरस्त मीडिया यानि वक्त आने पर सेक्युलर, वक्त आने पर कम्युनल और वक्त आने पर राष्ट्रवादी, बस मौका भुनाने का सही वक्त हो. ये रही हमारी भूमिका जो समझना नाकाफी है.  कॉर्पोरेट मीडिया देश को उतना नहीं तोड़ रही जितनी गोदी मीडिया का आतंक सर चढ़ के बोल रहा है, गोदी और कॉर्पोरेट मीडिया को मिक्स़प करके बनता है मोदी गोदी मीडिया, मोदी गोदी मीडिया का आशय सिर्फ एक ही होता है बीजेपी के आतंक से पीएम मोदी को विश्वगुरु बनाना जिसके लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है ये मिक्स़प मीडिया.

मिक्स़प (गोदी+कॉर्पोरेट) मीडिया का एक नज़ारा इन दिनों खूब देखने को मिल रहा है, मोदी के आतंक से देश की सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सच्चाई को बयां करने वाली एक बड़ी खबर देश के सभी बड़े मीडिया घरानों से ऐसे फुर्र हो गई की लिखने वाला रिपोर्टर को भी पता नहीं चला की आखिर कौन सा वायरस ने खबर को उड़ा दिया है. दरसल रिपोर्टर साहब खबर उड़ा नही खबर को उड़ा दिया गया है. मोदी जी के लाल लाल आँखों को देखने के बाद. मोदी जी का मीडिया पर आतंक इस तरह हवाई हुआ है कि उनके राजनीति के चाचा अमित शाह के खिलाफ एक खबर बर्दास्त नही हुआ और खुद तांडव और पद का दुरूपयोग करते हुए उस खबर को सभी टॉप मीडिया संस्थानों से बिना कारण हटा दिया गया. लेकिन सच्चाई ये भी है की मिक्स़प मीडिया के अलावा भी मिशनरी पत्रकारिता को जिन्दा किये हुए कुछ नए संसथान भी है जिसमे से आपका अपना न्यूज़ साईट JAIHINDMAITHILINEWS.IN भी है, जहाँ पर किसी भी खबर से कोई समझौता नहीं किया जाता है, यहाँ पर आप  न विधायक, न सांसद और न मंत्री हैं, फिर ऐसा कौन सा व्यापार है जो अमित शाह की संपत्ति 3 साल में 300 फ़ीसदी बढ़ गई !!  शीर्षक से खबर को पढ़ सकते हैं, और हमारी मैनेजमेंट टीम का वडा है हम कभी भी किसी भी खबर से समझौता नहीं करेंगे और आपके सामने हर उस पहलु को लाने का प्रयास करेंगे जिस वाकये से देश को तोड़ने की कोशिश की जा रहीं हो.

 बीजेपी के आतंक

यह ख़बर टाइम्स आॅफ इंडिया के अहमदाबाद संस्करण ने शनिवार को छापी थी, लेकिन प्रकाशन के कुछ ही घंटों में अख़बार की वेबसाइट से हटा ली गई. ख़बर क्यों हटाई गई, इस बारे में अख़बार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. अख़बार के संपादकों की तरफ से आधिकारिक रूप से इसकी कोई ज़िम्मेदारी भी नहीं ली गई है कि ख़बर क्यों हटा ली गई. इस ख़बर में बताया गया था कि कैसे पांच साल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति बढ़ गई है. 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने जो हलफनामा दाखिल किया था और 2017 में राज्यसभा के लिए जो हलफनामा दाखिल किया है, उसके मुताबिक उनकी संपत्ति में 300 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है.

 

 इस ख़बर में यह भी लिखा था कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए दिए गए हलफनामे के मुताबिक उनकी कॉमर्स की बैचलर डिग्री अभी पूरी नहीं हुई है.
बीजेपी के आतंक

स्मृति ईरानी 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ी थीं, जहां अपने हलफनामे में उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल आॅफ करेस्पॉन्सडेन्स से बीकॉम पार्ट वन, 1994 बताया था.

यही जानकारी उन्होंने 2011 के राज्यसभा चुनाव में भी दी थी, लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में वे दिल्ली के चांदनी चौक से चुनाव लड़ी थीं, जिसमें ईरानी ने बताया था कि वे 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल आॅफ करेस्पॉन्सडेन्स से बीए हैं.

यह ख़बर टाइम्स आॅफ इंडिया के सहयोगी संस्थानों जैसे नवभारत टाइम्स, इकोनॉमिक टाइम्स में भी छपी थी, लेकिन यह ख़बर वहां से भी हटा ली गई.

द वायर  ने टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादकों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस ख़बर के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी अपील की कि उनका नाम नहीं लिया जाना चाहिए. इन अख़बारों को छापने वाली कंपनी बेनेट एंड कोलमैन कंपनी लिमिटेड के प्रबंधन को इस सिलसिले में मैसेज किया गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.

बीजेपी के आतंक

अमित शाह की संपत्ति और स्मृति ईरानी की विवादित शैक्षणिक डिग्री के बारे में ये सूचनाएं उनके हलफनामे से ली गई थीं, जो उन्होंने गुजरात से राज्यसभा चुनाव के संबंध दाखिल किए हैं.

इसके पहले अमित शाह द्वारा 2012 और 2007 में दिए हलफनामों में भी उनकी संपत्ति में उन पांच सालों के दौरान छह करोड़ रुपये से ज़्यादा की बढ़ोत्तरी दिखाई देती है.

ऐसा लगता है कि टाइम्स आॅफ इंडिया ने अमित शाह और स्मृति ईरानी से जुड़ी यह ख़बर आंतरिक समीक्षा के चलते नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में हटाई है क्योंकि यही ख़बर डीएनए अख़बार की वेबसाइट पर भी छपी थी, लेकिन वहां से भी हटा ली गई.

बीजेपी के आतंक

हालांकि, डीएनए के ईपेपर में अब भी यह मौजूद है.

ये भी पढ़ें: 

 

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब टाइम्स आॅफ इंडिया ग्रुप ने अपने पाठकों को कारण बताए बिना ख़बर हटा दी हो. मई में टाइम्स आॅफ इंडिया और इकोनॉमिक टाइम्स ने वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की निचली रैंकिंग से संबंधित ख़बर हटा ली थी. इस संबंध में जब न्यूज़लॉन्ड्री वेबसाइट ने टीओआई डॉट इन के संपादक प्रसाद सान्याल से संपर्क किया कि लेख क्यों हटा लिया गया तो उनका जवाब था, ‘यह किसी मीडिया हाउस का संपादकीय विशेषाधिकार है.’

शनिवार, 29 जुलाई की रात आम आदमी पार्टी के एक नेता ने आउटलुक हिंदी मैगज़ीन की वेबसाइट का अमित शाह की संपत्ति से संबंधित स्टोरी का लिंक ट्विटर पर साझा किया

यह स्टोरी मोबाइल फोन पर गूगल के accelerated media pages (AMP) के कारण दिखती तो है पर AMP वर्ज़न से पूरी स्टोरी देखने की कोशिश में गूगल न्यूज़ की एक हेडलाइन आती है, जिसमें आउटलुक हिंदी की वेबसाइट का लिंक है, जिस पर क्लिक करने पर एरर पेज खुलता है.

बीजेपी के आतंक

आउटलुक हिंदी पत्रिका के संपादकीय विभाग में द वायर  ने संपर्क किया. नाम और बयान न छापने की शर्त पर उन्होंने बात तो की, लेकिन स्टोरी के बारे में कोई सूचना होने से इनकार किया. उनका यह भी कहना था कि टेक्निकल टीम से संपर्क करके जानकारी लेंगे कि स्टोरी क्यों हटाई गई.

गौरतलब है कि अमित शाह और अन्य लोगों द्वारा प्रस्तुत असली हलफ़नामे अब तक गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर नहीं डाले गए हैं, जैसा कि सामान्य प्रक्रिया के तहत होता है.

द वायर  को मिली जानकारी के अनुसार टाइम्स ऑफ इंडिया में स्मृति ईरानी पर सांसदों को मिलने वाली स्थानीय विकास निधि में गड़बड़ी का आरोप लगाने से संबंधित एक जनहित याचिका की ख़बर भी निशाने पर है. ऐसा बताया जा रहा है कि 27 जुलाई 2017 को प्रकाशित इस स्टोरी पर स्मृति ने आपत्ति जताई है.

बीजेपी के आतंक

हालांकि यह स्टोरी वेबसाइट पर देखी जा सकती है पर इसका सोशल मीडिया प्रमोशन बंद कर दिया गया है. इस पर भी टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादकों से कोई जवाब नहीं मिला.

पिछले हफ़्ते हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रतिष्ठित स्तंभकार सुशील आरोन का अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया एक लेख हटा लिया था. मोदी सरकार के चीन के साथ गतिरोध से न निपट पाने की आलोचना करते हुए इस लेख को हटा दिया गया. लेख को हटाने के बाद सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई, जिसके बाद इसे दोबारा वेबसाइट पर डाला गया.

द वायर  द्वारा इस लेख को हटाये जाने के बाद हिंदुस्तान टाइम्स की मालिक-संपादक शोभना भरतिया को सवाल भेजे गए थे, जिसका जवाब अब तक प्राप्त नहीं हुआ है.

 

सभी मीडिया घरानों से खबर को डिलीट करने के बाद सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही jaihindmaithilinews.in की खबर.

source: the wire hindi & team jaihindmaithilinews.in